प्रदेश के किसी भी गांव/नगर का विकास तब तक नहीं हो सकता जब तक विकास पुरूष स्थानीय न हों। प्रत्येक ग्राम/नगर में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो स्वावलंबन की दिशा में कार्य करते हैं। समाज की इसी स्वैच्छिक प्रवृत्ति को प्रोत्साहन देने हेतु प्रति वर्ष ग्राम/नगरीय क्षेत्रों में प्रस्फुटन समितियों का गठन किया जायेगा। स्थानीय समस्याओं व उनके समाधान की उपयुक्त जानकारी उन्हीं के पास होती है। न्यूनतम संसाधनों से किस प्रकार समुचितलाभ प्राप्त किया जाये इसका भी आंकलन स्थानीय लोगों द्वारा ही किया जा सकता है।
परिषद् का मुल उद्देश्य प्रदेश में समाज एवं शासन के मध्य सेतु के रूप में कार्य करना है। विकास के कार्यो में समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु यह आवश्यक है कि समाज विकास के विभिन्न विषयों में दक्ष स्वैच्छिक संगठन उपलब्ध हों । अत: विभिन्न विषयों जैसे जल संरक्षण, सबको शिक्षा सहित भारतीय संस्कारों की शिक्षा, नशामुक्ति, सबको स्वास्थय, हरियाली/पर्यावरण सरंक्षण, स्वच्छता एवं साफ सफाई, ऊर्जा संरक्षण,कृषि को लाभकारी बनाना, कुपोषण एवं परिवार नियोजन, समाजिक समरसतातथा विवाद रहित समाज/ग्राम आदि
राज्य की समस्त पंजीबद्ध संस्थाओं का पंजीयन कर उनका परीक्षण व मूल्यांकन किया जाएगा। उनकी ताकत, कमजोरियों व अवसरों का मूल्यांकन उनके कार्यालय, मैदानी कार्य व वार्षिक रिपोर्ट एवं अन्य प्रकाशित दस्तावेजों के आधार पर किया जायेगा तथा इसके आधार पर संस्थाओं का प्रत्यायन (Accreditation) किया जायेगा। यह प्रत्यायन विभिन्न शासकीय विभागों को उनके कार्यक्रमों हेतु प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वयंसेवी संस्थाएं उपलब्ध कराने का आधार बनेगा।
मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचल कला-संस्कृति से समृद्ध है। लोगों में पारम्परिक ज्ञान-विज्ञान, कौशल, कला, साहित्य व खेलों की प्रतिभा है। उद्योगों के आधुनिकीकरण के चलते पारम्परिक विधियों से निर्मित उत्पादों का चलन लगातार घटता चला जा रहा है। एक ओर जहां पारम्परिक ज्ञान एवं कौशल में दक्ष व्यक्ति अपनी आजीविका हेतु रोजगार के अन्य साधनों की ओर उन्मुख हो रहे है तथा नई पीढ़ी भी इस ज्ञान को प्राप्त करने हेतु प्रेरित नहीं हो पा रही है वहीं दूसरी ओर ऐसे व्यक्ति जो वर्तमान में भी इन पारम्परिक कार्यों में लगे हुए हैं
इस कार्यक्रम में स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर विकास के कार्यों के दौरान सीखी हुई सामूहिक प्रक्रियाओं को परस्पर बांटने, विकास की रणनीतियों में आ रहे व्यवधानों को चिन्हित करने तथा विकास की प्रक्रिया को गति देने हेतु किये जाने वाले प्रयासों को साझा करने के लिए तथा स्वैच्छिक संगठनों के साथ संवाद, संचार, अभिप्रेरणा और सूचना संप्रेषण के उद्देश्य से राज्य, संभाग, जिला और विकासखण्ड स्तर पर संगोष्ठियों तथा कार्यशालाओं का आयोजन किया जायेगा।
स्वयंसेवी संस्थाओं की मैपिंग की जाकर स्वयंसेवी संस्थाओं में विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण, समुदाय संगठन, सामुदायिक अनुश्रवण तथा मूल्यांकन के कौशलों से युक्त स्त्रोत व्यक्तियों की पहचान की जाएगी तथा परिषद् की योजनाओं/कार्यक्रमों, विभिन्न समसामयिक विषयों, शासकीय योजनाओं एवं स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर परिषद् के अधिकारी/ कर्मचारियों एवं परिषद् से संबद्ध स्वयंसेवी संस्थाओं की क्षमतावृद्धि हेतु प्रदेश व राष्ट्र स्तरीय के साथ-साथ अन्य स्तरों पर प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण आदि आयोजित किये जावेंगे।
सामयिक एवं अतिआवश्यक विषयों पर जन जागरूकता हेतु जमीनी स्तर पर व्यापक जन अभियान चलाए जायेंगे जिससे कि शासन के प्राथमिकता के विषयों पर आम सहमति बन सके तथा लोग स्वत: प्रेरित होकर इन विषयों में शासकीय प्रयासों में अपनी सहभागिता दे सकें। क्षेत्रीय सम्मेलन तथा राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किये जावेंगे।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (वर्ष 2025-26)
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