सृजन योजना
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1) अवधारणा :
मध्यप्रदेश के ग्रामीण अंचल कला-संस्कृति से समृद्ध है। लोगों में पारम्परिक ज्ञान-विज्ञान, कौशल, कला, साहित्य व खेलों की प्रतिभा है।
उद्योगों के आधुनिकीकरण के चलते पारम्परिक विधियों से निर्मित उत्पादों का चलन लगातार घटता चला जा रहा है। एक ओर जहां पारम्परिक
ज्ञान एवं कौशल में दक्ष व्यक्ति अपनी आजीविका हेतु रोजगार के अन्य साधनों की ओर उन्मुख हो रहे है तथा नई पीढ़ी भी इस ज्ञान को प्राप्त
करने हेतु प्रेरित नहीं हो पा रही है वहीं दूसरी ओर ऐसे व्यक्ति जो वर्तमान में भी इन पारम्परिक कार्यों में लगे हुए हैं वे स्पष्ट उद्देश्य एवं पूर्ण
समर्पण होने के पश्चात भी उचित मार्गदर्शन, सहयोग एवं वित्त पोषण न मिल पाने के कारण अपने प्रयासों का उचित परिणाम प्राप्त नहीं कर पा
रहे हैं। परिषद् की सृजन योजना में प्रत्येक जिले में से ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित कर आवश्यकता अनुसार सहयोग देकर उनकी प्रतिभा तथा सृजनात्मक
कार्यों को व्यवसायिक स्तर पर स्थापित किया जावेगा। सुदूर ग्रामीण अंचलों में छुपी हुई प्रतिभाओं को चिन्हित कर उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में विभक्त कर,
उनके ज्ञान कौशल और विशेषज्ञता का दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इस प्रकार उन्हें उचित प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराकर स्वरोजगार आदि के माध्यम
से व्यवसायिक क्षेत्र में स्थापित किया जा सकेगा। इस हेतु पारम्परिक देशज ज्ञान-विज्ञान, कौशल, कला, साहित्य व खेलों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु स्वैच्छिक
संगठनों से प्रस्ताव आमंत्रित कर उन्हें अनुदान राशि प्रदान की जावेगी।
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2) लक्ष्य :
प्रदेश में पारम्परिक देशज ज्ञान, परम्परा, कौशल का संरक्षण व संवर्धन करते हुए प्रतिभाओं को व्यवसायिक स्तर पर स्थापित कर आत्मनिर्भर म.प्र. का निर्माण करना।
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3) उदेद्श्य :
- पारंपरिक ज्ञान/तकनीक को विभिन्न विषयों में विभक्त कर क्षेत्र अनुसार चिन्हित कर सूचीबद्ध करना।
- ग्रामीण/वनवासी क्षेत्रों में ऐसे व्यक्तियों को जो पारंपरिक ज्ञान और कौशल में दक्ष हैं चिन्हित कर सूचीबद्ध करना।
- ग्रामीण/वनवासी क्षेत्रों में विलुप्त होते हुये पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण।
- ग्रामीण शिल्प एवं तकनीक पर कार्य करने वाले देश के प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों की पहचान एवं उनसे समन्वय स्थापित करना।
- चिन्हित प्रतिभाशाली व्यक्तियों को प्रशिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण दिलवाना।
- प्रशिक्षित कुशल प्रतिभाओं को व्यवसायिक स्तर पर स्थापित करने तथा क्षेत्रीय/स्थानीय उत्पादों के विक्रय हेतु फारवर्ड एवं बेकवर्ड लिंकेज के माध्यम से मार्केट उपलब्ध कराना।
- राज्य/संभाग/जिला स्तर पर सृजन मेलों का आयोजन करना।
- स्थानीय स्तर पर ईकाई/उपक्रम को स्थापित करने में सहयोग प्रदान करना।
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4) सलाहकार समिति :
योजना अंतर्गत तात्कालिक आवश्यकता अनुसार विषयों (Thurst area) के चिन्हाकंन का कार्य सलाहकार समिति द्वारा किया जावेगा। समिति की संरचना निम्नानुसार होगी-
- अध्यक्ष- परिषद् द्वारा नामांकित विषय विषेशज्ञ।
- सदस्य- क्षेत्र स्तरीय शैक्षणिक/वैज्ञानिक संस्थानों तथा सामाजिक/स्वैच्छिक संगठनों के कुल 08 विशेषज्ञ।
- सदस्य सचिव- सृजन योजना प्रभारी अधिकारी, म.प्र. जन अभियान परिषद्।
- सलाहकार समिति की बैठक जनवरी माह में आयोजित होगी। समिति की बैठक वर्ष में अधिकतम 2 बार आयोजित होगी।
कार्य-योजनान्तर्गत कार्यक्षेत्र, विषय वस्तु तथा कार्य के प्रकार का निर्धारण करना तथा अन्य गतिविधियों के आयोजन हेतु सलाह देना।